
अजीत मिश्रा (खोजी)
अमृत सरोवर पर भू-माफिया का ‘काला पंजा’: प्रशासन की नाक के नीचे लूटी जा रही सरकारी संपत्ति!
ब्यूरो रिपोर्ट: बस्ती मंडल, उत्तर प्रदेश
- मिट्टी माफिया के आगे नतमस्तक प्रशासन? चार दिनों तक सरेआम लुटता रहा अमृत सरोवर।
- जल संरक्षण या माफिया का संरक्षण? पोखरनी में ‘अमृत’ सुखाकर निकाली जा रही मिट्टी।
- साहब! आपकी नाक के नीचे सरोवर ‘साफ’ हो गया, क्या लखनऊ की टीम का ही इंतजार था?
- पोखरनी कांड: सीएम पोर्टल पर पहुंची शिकायत, क्या मिट्टी चोरों पर चलेगा बुलडोजर?
- अंधेर नगरी-चौपट राजा: रक्षक ही बने भक्षक, सरोवर की संरचना से खिलवाड़।
- अमृत सरोवर में ‘अवैध खनन’ का खेल, शिकायत के बाद हड़कंप।
- बस्ती: बहादुरपुर में खनन माफिया की दबंगई, ग्रामीणों में भारी उबाल।
- पट्टेदार का हक मारा, सरोवर का स्वरूप बिगाड़ा; अब जांच के घेरे में ‘मिट्टी चोर’।
बस्ती। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की महत्वाकांक्षी ‘अमृत सरोवर’ योजना, जिसे जल संरक्षण और पर्यावरण को बचाने के लिए करोड़ों की लागत से धरातल पर उतारा गया, अब बस्ती के बहादुरपुर ब्लॉक में भ्रष्टाचार और अवैध खनन की भेंट चढ़ रही है। ग्राम पंचायत पोखरनी में जो खेल पिछले चार दिनों से खेला गया, उसने यह साबित कर दिया है कि स्थानीय भू-माफियाओं के मन में न तो कानून का खौफ है और न ही सरकारी योजनाओं के प्रति कोई सम्मान।
विकास के सीने पर खनन का प्रहार
पोखरनी स्थित अमृत सरोवर से पिछले चार दिनों तक बेखौफ होकर जेसीबी गरजती रही और ट्रैक्टर-ट्रॉलियों से मिट्टी ढोकर बेची जाती रही। आश्चर्य की बात यह है कि जहाँ जल संचयन और मत्स्य पालन के लिए सरकार ने विशेष व्यवस्था की थी, वहाँ खनन माफिया सरोवर के वजूद को ही मिटाने पर तुले हुए हैं। यह केवल मिट्टी की चोरी नहीं है, बल्कि उस भविष्य की चोरी है जिसे जल संकट से उबारने के लिए बनाया गया था।
शिकायत हुई, पर क्या कार्रवाई होगी?
स्थानीय निवासी सुरेश श्रीवास्तव ने हिम्मत दिखाते हुए मुख्यमंत्री पोर्टल (जनसुनवाई) पर इसकी लिखित शिकायत दर्ज कराई है। शिकायतकर्ता के पास खुदाई के निशान, वीडियो और मिट्टी कहाँ गिराई गई है, इसका पूरा ब्यौरा मौजूद है। सवाल यह उठता है कि:
- क्या स्थानीय प्रशासन और पुलिस को चार दिनों तक चल रहे इस ‘खुले खेल’ की भनक नहीं लगी?
- मत्स्य पालन के लिए आवंटित पट्टे के अधिकारों का हनन किसकी शह पर हो रहा है?
- जब लखनऊ से खनन विभाग की टीम जांच के लिए सक्रिय है, तब भी स्थानीय स्तर पर इतनी ढिलाई क्यों?
“अगर समय रहते इन लुटेरों पर नकेल नहीं कसी गई, तो अमृत सरोवर जैसी योजनाएं केवल कागजों पर सिमट कर रह जाएंगी। यह सीधे तौर पर सरकारी राजस्व और प्राकृतिक संसाधनों की डकैती है।” — स्थानीय ग्रामीण
प्रशासन को खुली चुनौती
हाल के दिनों में बस्ती जिले में अवैध खनन के मामले तेजी से बढ़े हैं। प्रशासन ने कुछ जगहों पर जेसीबी और ट्रक जब्त करके खानापूर्ति तो की है, लेकिन ‘पोखरनी कांड’ के मास्टरमाइंड अभी भी कानून की पहुंच से दूर हैं। ग्रामीणों में भारी आक्रोश है और उनकी मांग स्पष्ट है— दोषियों पर मुकदमा दर्ज हो, सरोवर की मरम्मत कराई जाए और ऐसी सुरक्षा व्यवस्था हो कि भविष्य में कोई सरकारी संपत्ति को छूने की हिम्मत न कर सके।
अब देखना यह है कि मुख्यमंत्री पोर्टल पर गई इस शिकायत के बाद बस्ती प्रशासन नींद से जागता है या फिर भू-माफिया अपनी रसूख के दम पर इस मामले को भी ठंडे बस्ते में डलवा देते हैं।
















